'समयविज्ञान' और संसार !

Category: Education Published: Thursday, 31 August 2017 Written by Dr S N Vajpayee

मानव जीवन एवं प्रकृति को संचालित करने में  'समयविज्ञान' की बहुत बड़ी भूमिका है क्योंकि जीवन और प्रकृति से संबंधित अच्छी बुरी हर घटना समय के अनुशार ही घटित होती है इसलिए उसका पूर्वानुमान भी समय के द्वारा ही समयविज्ञान पद्धति से लगाया जा सकता है वही सटीक होगा !

    यहाँ तक कि  वर्षा बाढ़ आँधी तूफान हों या भूकंप जैसी बड़ी प्राकृतिक घटनाएँ इनके होने न होने का कारण भी समय ही है इसलिए इससे संबंधित कोई भी पूर्वानुमान समयविज्ञान से ही लगाना संभव है!आधुनिक विज्ञान के पूर्वानुमानों का आधार समयविज्ञान न होने के कारण ये विषय अभी तक रहस्य बने हुए हैं | भूकंपों के आने का कारण पहले ज्वालामुखियों को बताया गया फिर कृत्रिम जलाशयों को अब धरती के अंदर संचित गैसों के दबाव से अस्थिर होने वाली भूमिगत प्लेटों को उसी दृष्टि से गंभीर गड्ढों को खोदकर उसके अंदर भूकम्पों से संबंधित अध्ययनों के प्रयास किए जा रहे हैं जबकि समयविज्ञान विधा के अनुशार भूकंपों के होने का कारण समय को ही माना गया है इसलिए ऐसे अनुसंधानों के लिए 'समयविज्ञान' की मदद  काफी सफलता प्रदान कर सकती है ! 

     चिकित्सा के क्षेत्र में भी 'समयविज्ञान' की महत्वपूर्ण भूमिका है सामूहिक महामारी ये डेंगू जैसी ऋतु जनित बीमारियाँ समय के कारण ही घटित होती हैं इसीलिए मच्छरों के बीच रहने वालों की अपेक्षा डेंगू उन्हें अधिक होता है जहाँ मच्छरों का पहुँचना भी कम संभव हो पाता है !

    किसी व्यक्ति के भविष्य में होने वाले रोगों एवं  उनके वर्षों का पूर्वानुमान इसी  समयविज्ञान के द्वारा लगाया जा सकता है !किसी रोग के प्रारंभ होने या चोट चपेट  से घायल होने पर ये रोग या चोट की गंभीरता का पूर्वानुमान एवं चिकित्सा के असर होने न होने का पूर्वानुमान 'समयविज्ञान'से लगाया जा सकता है !

       मनोरोग(तनाव)जैसी गंभीर समस्या समय के आधीन है समय के अनुशार स्वभाव बदलता रहता है और स्वभाव के अनुशार सोच बदलती जाती है इसीलिए तो किसी वस्तु ,व्यक्ति या उसके व्यवहार को  कभी हम पसंद करने लगते हैं  कभी नापसंद करते हैं और कभी हमें उनसे घृणा होने लगती है जबकि वे तो वही रहे किंतु हमारी सोच बदलती रही जिसका प्रमुख कारण समय था ! इसलिए जीवन के किस वर्ष में किसे तनाव होगा इसका पूर्वानुमान समयविज्ञान विधा से किसी के विषय में कभी भी लगाया जा सकता है ! 

     इतना ही नहीं अपितु समय विज्ञान  समाज में, सरकार में संगठनों में एवं स्त्री  पुरुषों के बनने बिगड़ने वाले आपसी  संबंधों के विषय में पूर्वानुमान लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है |पिछले लगभग बीस वर्षों से मैं ऐसे सभी विंदुओं पर शोध करता आ  रहा हूँ  सभी दृष्टियों से इससे अत्यंत उत्तम परिणाम मिले हैं !  

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