शारीरिक और मानसिक पूर्वानुमानविज्ञान की उपेक्षा से होते हैं नुकसान ?

Category: Nature Published: Monday, 19 November 2018 Written by Dr. Shesh Narayan Vajpayee

              पूर्वानुमान केवल मौसम का ही क्यों जीवन का क्यों नहीं ?

      अच्छी बुरी घटनाएँ यदि प्रकृति में घटित होती हैं तो जीवन में  भी तो घटित होती रहती हैं!प्राकृतिक घटनाएँ यदि प्राकृतिक वातावरण को बना बिगाड़ सकती है तो जीवन में घटित होने वाली घटनाएँ जीवन को भी बना बिगाड़ देती हैं!प्रकृति में यदि वर्षा बाढ़ सूखा आँधी तूफ़ान भूकंप आदि घटनाएँ घटित होती हैं तो मनुष्य शरीरों में भी तो ऐसे ही अनेकों प्रकार के रोग दोष ,चोट-चभेट आदि घटनाएँ घटित होती रहती हैं!जीवन के लिए शरीर और मन से संबंधित समस्याएँ भी बहुत महत्त्व रखती हैं !जीवन के लिए मौसम का पूर्वानुमान जानना यदि आवश्यक होता है तो शरीर के लिए शारीरिक और मानसिक घटनाओं का पूर्वानुमान लगाना भी बहुत आवश्यक होता है !मौसम विज्ञान की पक्रिया से यदि मौसम संबंधी पूर्वानुमान लगा लिया जाता है तो शरीरविज्ञान की पद्धति से शरीर संबंधी पूर्वानुमान लगाने की उपेक्षा क्यों की जा रही है उसका भी तो अनुसंधान किया जाना चाहिए !माना की आधुनिक मौसम वैज्ञानिकों में पूर्वानुमान जानने की क्षमता का अभाव है इसीलिए तो वो मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के नाम पर झूठ बोलकर सरकारों को बरगलाया करते हैं ! इसलिए प्राचीन मौसम विज्ञान विभाग तो प्रकृति और जीवन से संबंधित सभी प्रकार के पूर्वानुमान लगाने में सक्षम है !
         निकट भविष्य में यदि किसी के शरीर और मन में कोई बुरी घटना घटित होने वाली है तो उसका पता यदि पहले से लगा लिया जाए तो भविष्य में संभावित अप्रिय घटनाओं के दुष्प्रभाव को प्रयास पूर्वक कुछ कम करने का प्रयास किया जा सकता है !किस समय में किस प्रकार की मानसिक समस्याएँ कितने समय के लिए फैलेंगी इसका पूर्वानुमान लगा करके उतने समय को धैर्य साहस संयम और सहनशीलता के साथ पार किया जा सकता है!किंतु जब यही विपरीत समय अचानक आ जाता है उसके लिए कोई मानसिक आदि तैयारी नहीं की गई होती है तब वही मानसिक तनाव चिंता भय निराशा आदि अचानक अपने आगोश में ले लेते हैं उनसे बच पाना बहुत कठिन होता है !
     शारीरिकरोग या मानसिक तनाव आदि रोग ये उसी प्रकार की शरीर और मन से संबंधित आपदाएँ हैं जिसप्रकार से सूखा-बाढ़, तूफ़ान, भूकंप आदि प्राकृतिक आपदाएँ होती हैं !मनुष्यादि सभी प्राणियों का जीवन इन दोनों प्रकार की ही आपदाओं से पीड़ित होता है !
    मौसमविज्ञान के द्वारा यदि प्रकृति में घटित होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है तो शरीरविज्ञान के द्वारा शरीर संबंधी घटनाओं का भी तो पूर्वानुमान लगाया जाना चाहिए !

Hits: 14