'व्यापारविज्ञान'- व्यापार करने के लिए ये बहुत आवश्यक होता है !जानिए कैसे ?

Category: व्यापार (Business) Published: Sunday, 24 February 2019 Written by Dr. Shesh Narayan Vajpayee

      'व्यापारविज्ञान' वो विज्ञान है जिसे पढ़कर समझकर एवं पालन करके लोग जीरो से हीरो बनते देखे जाते हैं!इसे जाने बिना लोग तरह तरह से नुक्सान उठाया करते हैं और पंडितों पुजारियों बाबाओं तांत्रिकों मुल्लों मालवियों के यहाँ धक्के खाया करते हैं !जो निष्फल होता है !इसलिए यदि आप कोई व्यापार करना चाह रहे हैं या पहले से करते चले आ रहे हैं और आपके मन में  शंका है कि व्यापार चलेगा या नहीं चलेगा अथवा जो व्यापार पहले से चला आ रहा है उसमें जो सफलता मिलनी चाहिए वो नहीं मिल पा  रही है या उसमें नुक्सान होता चला जा रहा है या किसी तांत्रिक जादू टोना आदि वाले ने आपके मन में कोई वहम डाल रखा है और आप उससे परेशान हैं तो आप इन सभी अंधविश्वासों से ऊपर उठकर एक बार इस 'व्यापारविज्ञान' को अवश्य पढ़िए और सोचिए कि गलती आपसे आखिर हो कहाँ रही है !

व्यापार शुरू करने  वाले कुछ व्यक्ति धन संसाधन और अच्छा अनुभव होने के बाद भी असफल  होते  देखे जाते हैं जबकि वे परिश्रम भी बहुत करते हैं फिर भी सफलता नहीं मिलती है ! ऐसे समय लोग कर्म भाग्य लक कुदरत आदि का दोष  मानकर निराश हो जाते हैं !ऐसे हैरान परेशान निराश हताश लोग पंडितों पुजारियों तांत्रिकों मुल्ला मौलवियों वास्तु वालों के यहाँ चक्कर लगाने लगते हैं जहाँ उनकी समस्याओं का समाधान तो होना तो संभव होता ही नहीं है उलटे वो लोग तमाम प्रकार के बहम डाल कर चले जाते हैं पैसे भी ले जाते हैं ऐसे असफल व्यापारी लोग लुट-पिट कर तनाव अवसाद डिप्रेशन आदि में चले जाते हैं !

       इसलिए ऐसे वैज्ञानिक युग में तमाम अंधविश्वासों के चक्कर में न पढ़कर  'समयविज्ञान' 'नामविज्ञान' और  'स्थानविज्ञान' का सहयोग हमारे यहाँ से लेकर अपने व्यापार को प्रारंभ करना या बिगड़े हुए व्यापार को ठीक ढंग से व्यवस्थित करना चाहिए !                  

उद्योग व्यापार आदि के लिए समय ,नाम और स्थान का महत्त्व !
        किसी व्यापारी का समय सही न हो तो कितना भी प्रयास और परिश्रम किया जाए तो भी लाभ न होकर अपितु घाटा होता जाता है !इसी प्रकार से नाम का  दोष होने पर किसी से संबंध ही नहीं बन पाते हैं लेबर कारीगर ग्राहक आदि साथ छोड़ देते हैं !इसलिए व्यापार नष्ट हो जाता है !ऐसे ही यदि व्यापार करने का स्थान ठीक न हो !
     तो ऐसे स्थान पर काम करने से न अपने को   यदि आपको  नया उद्योग व्यापार आदि नया शुरू करना है या चलते हुए उद्योग व्यापार आदि को अच्छा लगता है न अपने कर्मचारियों कारीगरों ग्राहकों आदि को !सबको बेचैनी घबड़ाहट अरुचि आदि होने लगती है !इस कारण से व्यापार नहीं चल पाता है !इन्हीं 'समय' 'नाम' 'स्थान' आदि  'तीनों बातों को अब आप विस्तार से समझिए -
       1. व्यापार करने के लिए 'समय' का महत्त्व -
       जिसका समय जिस प्रकार के काम के लिए अच्छा होता है उसे ही उस समय में और उस प्रकार के काम में या उद्योग व्यापार आदि में लाभ होता है !इसलिए अच्छे प्रयास तो बहुत लोग करते देखे जाते हैं उसके लिए परिश्रम भी बहुत करते हैं धन लगाते हैं आवश्यक संसाधन जुटाते हैं किंतु इतना सब कुछ होने पर भी उस काम से आपको लाभ तभी होता है जब आपका समय अच्छा होता है ! इसलिए आपके उद्योग व्यापार आदि की सफलता में आपके समय की बहुत बड़ी भूमिका होती है !
      यदि आप कोई फर्म या उद्योग लगाना चाहते हैं तो आपके घर के सदस्यों में से जिसका समय सबसे अच्छा हो उसी के नाम से काम शुरू किया जाना चाहिए !साथ ही यह भी पता होना चाहिए कि उसका अच्छा समय है कब तक एवं उसके बाद आपके घर के किस सदस्य का समय कब अच्छा आएगा ?उसी के अनुसार उद्योग स्थापित करना चाहिए !
      जिसका समय जिस प्रकार के काम के लिए अच्छा हो उसके नाम से उसी प्रकार का कार्य व्यापार या उद्योग प्रारंभ करना चाहिए !
     वह उद्योग आदि यदि आप किसी पार्टनर के साथ लगाते हैं तो उस पार्टनर का भी उस प्रकार के काम के लिए समय अच्छा होना चाहिए !
   उस काम में आपका साथ देने वाले जितने कर्मचारियों का समय जितना अधिक  अच्छा होता है वे उस काम में आपकी उतनी अच्छी मदद कर पाते हैं !
  नोट - प्रत्येक व्यक्ति का स्वभाव उसके समय के अनुसार बदलता रहता है उसका उसके बात व्यवहार पर भी असर  पड़ता है !एक समय उसे जो बात व्यवहार आदि पसंद होता है दूसरे समय में उसे उन्हीं परिस्थितियों में तनाव होने लगता है इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए !
 विशेष - जिस कर्मचारी का समय अच्छा होता है वो परेशान होकर नहीं रह सकता है इसलिए ऐसे कर्मचारियों की दूसरे कर्मचारियों से तुलना किए बिना इन्हें कुछ अतिरिक्त सुविधाएँ देकर भी बनाए रखना चाहिए !    
2. व्यापार करने के लिए 'नाम' का महत्त्व -
          यदि आप कोई कंपनी या फैक्ट्री चलाते हैं या कोई अन्य उद्योग है तो आपको उसमें  कर्मचारी रखने होते हैं   उन्हें उनकी योग्यता काम या विश्वसनीयता के आधार पर सबको अलग अलग जिम्मेदारी देनी पड़ती है जिनके अनुसार उन्हें आपके प्रति  समर्पित भावना से एक दूसरे के साथ मिलकर काम करना होता है !यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो आपका नुक्सान होता है !ऐसी परिस्थिति में हमारे यहाँ से आपको सलाह मिल सकती है कि जिस नाम के व्यक्ति को जिस नाम की फर्म में आप काम के लिए रख रहे हैं वो व्यक्ति अपनी सेवाओं से उस फर्म को कितना लाभ पहुँचा पाएगा !
      दूसरी बात उस व्यक्ति के नाम के आधार पर आपको बताया जाएगा कि वो व्यक्ति आपके साथ कितनी ईमानदारी और कितनी बफादारी से जुड़कर कितने समय तक काम कर पाएगा !उसका विश्वास आपको कितना करना चाहिए !
      तीसरी बात उस व्यक्ति के स्वभाव के विषय में आपको बताया जाएगा कि वो व्यक्ति आपकी या अपने साथ काम करने वाले लोगों की किस किस प्रकार की बातों एवं व्यवहारों  को सह पाएगा और क्या नहीं सह पाएगा !      
     चौथी बात  उस व्यक्ति की रूचि किस किस प्रकार के कामों को करने की होगी जिन्हें वो आसानी से उत्साह पूर्वक अच्छे से करता जाएगा !
        पाँचवीं बात वो व्यक्ति किस नाम वाले आपने से सीनियर कर्मचारी की बात मान पाएगा और किस नाम के अपने से जूनियर कर्मचारी को अपनी बात मनवा पाएगा !
      6  वो  व्यक्ति किन किन नामों वाले कर्मचारियों के साथ ग्रुप बनाकर आपके या  आपकी फर्म के विरुद्ध कोई  षडयंत्र कर सकता है !इसे रोकने के लिए आपको अपने किस नाम के  अपने बफादार कर्मचारी को उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रखा जाना चाहिए !
      7 आपकी फर्म में आपके पति पत्नी पुत्र पुत्री भाई बहन या पार्टनर आदि कई मालिक हैं तो उनमें से किस नाम का मालिक किस नाम के कर्मचारी से कितने अच्छे ढंग से काम ले पाएगा !
     8. जिस कर्मचारी का समय जितना अधिक अच्छा होता है उसके रहने से उस फर्म को उतना अधिक लाभ होता है !  
3.व्यापार करने के लिए 'स्थान' का महत्त्व -     
         कोई भी उद्योग व्यापार आदि आप जिस स्थान पर प्रारंभ करना चाहते हैं वो भूमि इतनी अच्छी हो जहाँ बहुत लोगों का मन बार बार आने का हो वहाँ रुकने का हो ! जो जगहें बहुत अच्छी होती हैं वहाँ बाजार मेला आदि सफल हो पाते हैं !इसीप्रकार से बाजार या शहरों आदि में भी जो छोटे छोटे भूखंड अलग अलग प्रकार के होते हैं जो कुछ कम या कुछ अधिक अच्छे होते हैं उनमें से जो जितना अधिक अच्छा होगा वो भूखंड  स्थान विज्ञान की दृष्टि से उद्योग व्यापार के लिए बहुत अच्छी होती है !
नौकरी आदि वालों के लिए विशेष बात -
  यदि आप कहीं नौकरी करते हो तो जो समय आपका अच्छा होता है उसमें तो उस कंपनी का मालिक या आपका सीनियर आपको महत्त्व देता है और आपकी सुख सुविधाओं का ख्याल रखता है आपकी इच्छा का सम्मान करता है आपको महत्त्व देता है आपकी प्रशंसा करता है !आपकी अधिकाँश माँगें मानते जाता है क्योंकि आपके अच्छे समय का उसे लाभ हो रहा होता है !किंतु जब आपका समय खराब चलने लगता है तब ये सभी बातें उलटी होती जाती हैं उससे दुःख होता है !
     जिस जिस व्यक्ति के साथ आपका नामदोष नहीं है उस उस व्यक्ति के साथ आपके संबंध मधुर हो जाते हैं इसलिए आपके साथ काम करने वाले लोगों का तालमेल यदि आपके साथ ठीक बैठ जाता है तब तो कार्यस्थल पर बहुत लोग आपसे प्रेम पूर्वक व्यवहार करने लगते हैं किंतु यदि आपका उन लोगों के साथ तालमेल ठीक न हो तो  आपके साथ अच्छा वर्ताव नहीं करते हैं !इसलिए जहाँ भी जिसके साथ भी सीनियर या जूनियर के रूप में आपको काम करना पड़े तो आपको इस  बात का पूर्वानुमान लगा लेना चाहिए कि आपकी किस नाम के व्यक्ति से मित्रता हो सकती है और किससे नहीं !आपको किसका विश्वास करना चाहिए किसका नहीं उसी हिसाब से आपको सबके साथ तालमेल बनाकर चलना चाहिए !
     कई बार जिस स्थान पर आपको  काम करना पड़ रहा है वो स्थान ही अच्छा नहीं होता है उस कारण से वहाँ पहुँचते ही आपको तनाव घबड़ाहट बेचैनी आदि होने लगती है जिससे आपकी परेशानी उस स्थान के कारण बढ़ती चली जाती है जबकि आप अपने उस तनाव का कारण अपने आस पास वाले सीनियर जूनियर आदि सहयोगियों को मानकर आप उनके साथ कलह किया करते हैं !जिसका नकारात्मक असर आपकी इमेज पर पड़ने लगता है !

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